जमशेदपुर
जमशेदपुर में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का मार्च, SIR और मतदाता सूची पर उठाए सवाल
पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस ने आमबगान मैदान से उपायुक्त कार्यालय तक मार्च निकालकर चुनावी प्रक्रिया, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया। पार्टी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर स्पष्टीकरण और चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की।

मुख्य बातें
- पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस ने जमशेदपुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मार्च और प्रदर्शन किया।
- मार्च आमबगान मैदान से उपायुक्त कार्यालय तक निकाला गया।
- कांग्रेस ने SIR, Form-6, मतदाता सूची और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े मुद्दे उठाए।
- पार्टी ने निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दर्ज 14 लिखित आपत्तियों पर स्पष्टीकरण की मांग की।
- कांग्रेस ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की।
- गोवा में 97 मतदाताओं से जुड़े तकनीकी मुद्दे को भी कांग्रेस ने उठाया; बाद में ECI ने 81 मामलों में Form-6 दाखिल होने की जानकारी दी।
- निर्वाचन आयोग ने अपने निर्णयों को पूर्ण आयोग की सहमति से लिया गया बताया है।
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी ने 28 सितंबर को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के विरोध में मार्च एवं प्रदर्शन किया। जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के नेतृत्व में निकला मार्च साकची स्थित आमबगान मैदान से शुरू होकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचा। यहां कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता अधिकारों और निर्वाचन संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर अपनी मांगें रखीं।
प्रदर्शन के दौरान बन्ना गुप्ता ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार का महत्वपूर्ण आधार है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने हाल में सामने आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर सवाल उठाए।

14 लिखित आपत्तियों का मुद्दा उठाया
कांग्रेस नेताओं ने द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसके अनुसार निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम हटाने और बहाल करने, डिजिटल मतदाता डेटाबेस की पहुंच, पश्चिम बंगाल में अपीलों और SIR से जुड़े विषयों का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस ने विशेष रूप से Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा, मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण, राज्य एवं स्थानीय स्तर के चुनाव अधिकारियों की तकनीकी पहुंच, आयोग के नाम से जारी संचार की स्वीकृति और मतदाता सूची से जुड़े IT सिस्टम की निगरानी को लेकर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि रिपोर्ट में गोवा के 97 मतदाताओं से जुड़ी एक तकनीकी समस्या का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर पात्र पाए गए इन मतदाताओं के नाम तकनीकी कारणों से अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। बाद की रिपोर्टिंग में निर्वाचन आयोग की ओर से बताया गया कि इनमें से 81 लोगों ने Form-6 दाखिल कर दिया है और उनके नाम शामिल करने की प्रक्रिया के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस ने रखीं कई मांगें
जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह ने मांग की कि SIR से संबंधित महत्वपूर्ण आदेश, आपत्तियां और उनके निस्तारण की प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए। उन्होंने निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दर्ज 14 आपत्तियों पर बिंदुवार स्पष्टीकरण देने, मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस का स्वतंत्र ऑडिट कराने और Form-6 तथा SIR से जुड़े बदलावों की वैधानिकता स्पष्ट करने की मांग की।
कांग्रेस ने मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता, तकनीकी या प्रक्रियागत कारणों से प्रभावित मतदाताओं की समीक्षा तथा चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच की भी मांग रखी।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी कुछ प्रक्रियागत कमियों का राजनीतिक असर पड़ा है। पार्टी ने इन मामलों की स्वतंत्र और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग की। इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन मतदाता के अधिकार और चुनावी संस्थाओं में विश्वास से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए है। पार्टी ने कहा कि जब तक इन सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक वह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से यह मुद्दा जनता के बीच उठाती रहेगी।
उधर, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि उसके महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए थे। आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों को संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा बताया है और 27 सितंबर की बैठक के बाद चुनावी प्रक्रिया से जुड़े नौ फैसलों की जानकारी भी जारी की।
मामले को लेकर कांग्रेस और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक बहस जारी है। SIR, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक दलों और निर्वाचन आयोग की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
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