गिरिडीह
गिरिडीह के मधुबन में बोले मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन: आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार, संविधान में भी मान्यता
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पीरटांड़ के मधुबन में 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' को संबोधित किया। उन्होंने आदिवासी समाज के संगठन, नशामुक्ति और परंपराओं की समझ पर जोर दिया।

मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पीरटांड़ के मधुबन थाना मैदान में महासम्मेलन को संताली भाषा में संबोधित किया।
- उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं, जिन्हें संविधान में भी मान्यता दी गई है।
- मुख्यमंत्री ने नशाखोरी को आदिवासी समाज को कमजोर करने वाला कारण बताया और इसे छोड़ने की अपील की।
- हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना चलाई जा रही है।
- मंच के ज्ञापन पर न्यायसंगत बात करने और समाज को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित 'मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन' में हिस्सा लिया। संताली भाषा में जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं और भारतीय संविधान में भी इन्हें मान्यता दी गई है।
मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई कार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने के प्रयासों की सराहना की और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने मरांग बुरू धोरोमगाड़ के संरक्षण और देखभाल को सभी की नैतिक जिम्मेदारी बताया।

परंपरा और समाज की स्थिति
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज को देश का सबसे पुराना समाज बताया। उन्होंने कहा कि समाज की जड़ें मजबूत हैं, लेकिन शाखाएं अलग हो गई हैं। उनके अनुसार, आज समाज के कुछ लोग खुद को हिन्दू मानते हैं, तो कुछ सरना कहते हैं।
युवाओं से उन्होंने अपनी परंपरा, रीति-रिवाज और समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने का आह्वान किया। अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन और माता रूपी सोरेन के निधन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पारंपरिक विधि-विधान और रीति-रिवाज से उनका द्वादशकर्म किया गया।
सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज अब भी शैक्षणिक और आर्थिक रूप से कमजोर है। पशुपालन और कृषि समाज की आजीविका के मुख्य साधन रहे हैं, लेकिन मौजूदा पीढ़ी इनसे दूर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड को अलग राज्य बने 25 वर्ष से अधिक हो गए, फिर भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ है।
नशामुक्ति पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशाखोरी आदिवासी समाज को कमजोर कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार 'नशामुक्त जीवन हो हमारा' के तहत सामूहिक जागरूकता अभियान चला रही है। हड़िया और अवैध शराब के निर्माण व बिक्री की रोकथाम के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना भी चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य हड़िया-दारू बेचने वाली महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना है। उन्होंने लोगों से नशाखोरी बंद करने की अपील की।
ज्ञापन और उपस्थिति
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंच की ओर से दिए गए ज्ञापन पर न्यायसंगत बात होगी और समाज के लोगों को हरसंभव मदद मिलेगी।
महासम्मेलन में विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू और सचिव विष्णु किस्कू मौजूद रहे। झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ असम, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और बंगाल सहित अन्य राज्यों से भी आदिवासी समाज के प्रतिनिधि पहुंचे।
मधुबन स्थित सीआरपीएफ कैंप परिसर के हेलीपैड पर पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन ने मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। आईजी, डीआईजी, उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने उनका स्वागत किया।
नागरिक पत्रकारिता
कुछ ऐसा दिखा जिसकी ख़बर बननी चाहिए?
तस्वीरें, वीडियो या जानकारी अनजान ख़बर न्यूज़रूम को भेजें। हम हर सूचना की पुष्टि के बाद ही प्रकाशित करते हैं और अपने सूत्रों की पहचान सुरक्षित रखते हैं।




