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जमशेदपुर

जमशेदपुर के जुबिली पार्क में नेहरू के लगाए पौधे ने लिया विशाल बरगद का रूप, 68 साल पुरानी है कहानी

जमशेदपुर के जुबिली पार्क में टाटा स्टील की स्वर्ण जयंती पर 1 मार्च 1958 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा लगाया गया पौधा अब विशाल बरगद बन चुका है। पेड़ के पास लगे शिलापट्ट पर रोपण का ब्योरा दर्ज है।

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बरगद के विशाल तने और लटकती जड़ों के बीच सफेद चबूतरे पर लगा काला शिलापट्ट, जिस पर अंग्रेजी में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1 मार्च 1958 को टाटा स्टील की स्वर्ण जयंती के अवसर पर पौधा लगाए जाने की बात लिखी है। आगे हरे पौधे दिख रहे हैं।
जमशेदपुर के जुबिली पार्क में बरगद के पास लगा शिलापट्ट, जिस पर नेहरू द्वारा 1 मार्च 1958 को पौधरोपण का उल्लेख है।. फ़ोटो: Anjaan Khabar

मुख्य बातें

  • बरगद का यह पेड़ जुबिली पार्क में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के पास वाले गेट की ओर स्थित है।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू ने टाटा स्टील की स्वर्ण जयंती पर 1 मार्च 1958 को यह पौधा रोपा था।
  • चबूतरे पर लगे शिलापट्ट पर अंग्रेजी में रोपण का उल्लेख दर्ज है।
  • एक अन्य बोर्ड पर जमशेदजी नसरवानजी टाटा की दूरदर्शिता पर नेहरू के विचार अंकित हैं।
  • टाटा स्टील ने 1958 में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए थे।

जमशेदपुर के जुबिली पार्क में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के पास वाले गेट की ओर एक विशाल बरगद का पेड़ है, जिसका संबंध देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से है। नेहरू ने टाटा स्टील की स्वर्ण जयंती के अवसर पर 1 मार्च 1958 को यहां पौधा रोपा था। 68 साल बाद वही पौधा विशाल वटवृक्ष बन चुका है।

शिलापट्ट पर दर्ज है रोपण की तारीख

पेड़ के पास बने चबूतरे पर लगे शिलापट्ट पर अंग्रेजी में लिखा है कि नेहरू ने 1 मार्च 1958 को टाटा स्टील की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में यह पौधा लगाया था। टाटा स्टील ने 1958 में अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए थे।

उस अवसर पर जमशेदपुर में आयोजित समारोह में नेहरू की मौजूदगी शहर के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी। उसी दौरान लगाया गया पौधा समय के साथ बरगद बन गया। इसकी फैली शाखाएं और जमीन तक उतरती जड़ें शहर के औद्योगिक इतिहास की याद दिलाती हैं।

जमशेदजी टाटा की सोच पर नेहरू के विचार

यहां लगे एक अन्य बोर्ड पर जमशेदजी नसरवानजी टाटा के साहस, विचारों और दूरदर्शिता को लेकर नेहरू के विचार भी अंकित हैं। नेहरू ने कहा था कि जब कोई व्यक्ति उस समय की प्रचलित सोच से अलग हटकर विचारों और कार्यों में नेतृत्व करता है, तो वही सच्चा साहस होता है। उन्होंने जमशेदजी टाटा की सोच को इसी साहस और दूरदर्शिता का उदाहरण बताया था।

जमशेदजी टाटा ने भारत में आधुनिक उद्योगों की नींव रखने का सपना उस दौर में देखा था, जब देश में औद्योगिक विकास की संभावनाएं सीमित थीं। उनकी इसी सोच ने जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर की आधारशिला रखी।

स्रोत: Reporter input

नागरिक पत्रकारिता

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